1. जाति में प्रेम, सहभागिता की भावना उत्पन्न करना।
2. जति में कुरीतियों जैसे- बाल विवाह, बहुविवाह, अनमेल विवाह, मृतक भोज एंव दहेज प्रथा आदि को दूर करने का प्रयास करना व सामूहिक आदर्श विवाहों का संचालन करना।
3. ग्रामीण औषधालयों की स्थापना, गांव गरीब को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना। विशेष कर महिलाओं हेतु अस्पताल की धर्मार्थ स्थापना करना।
4. जनसंख्या नियंत्रण हेतु जागरूकता पैदा करना और परिवार कल्याण कार्यक्रमों को बढावा देना।
5. जन सामान्य को स्वास्थ्य के प्रति सचेत कर जानलेवा बीमारियों सें बचाने के प्रयास करना। कुष्ठ, एड्स व कैसंर आदि असाध्य रोगों के बारे में जनजागरण करना तथा रोगियों की सहायता करना।
6. शोषण, अन्याय, घृणा, दोषमुक्त, समतामूलक समाज की स्थापना जहाँ सबका विकास के उपयुक्त अवसर उपलब्ध हों। सर्वाधिक पिछडे, पीडित समूह के सर्वागींण विकास एंव उन्नति हेतु कार्य करना।
7. समाजिक कुरीतियों नशाखोरी एंव विसंगतियों के खिलाफ जन-जागरण।
8. ग्रीबों, बालिकाओं व मेधवी छात्रों को उच्च शिक्षा एंव तकनीकी शिक्षा हेतु बढावा देनाए सहयोग करना। उनके लिये शिक्षा केन्द्रए वाचनायल संचालित करना।
9. सजातीय भेदभावों को दूर करना एंव संगठित रहने के लिये प्रेरित करना व आपसी सद्भावनाए मातृत्व भावना एवं देश प्रेम की भावना तथा आदर्श नागरिक की भावना का विकास करने का प्रयास करना।
10. शिक्षा के प्रचार-प्रसार से राष्ट्र के लिये सुयोग्य नागरिकों का निर्माण करना तथा क्षेत्रीय विकास हेतु शिक्षण संस्थानों के व्यायामशाला, वाचनालय, पुस्तकालय, छात्रावास, शिक्षा ध् शिक्षण केन्द्रों की स्थापना करना, बेरोजगार बालक ध् बालिकाओं को रोजगार दिलाने हेतु उन्हें मार्गदर्शित करना।
11. अनावश्यक खर्च को रोकना व बाल विवाह रोकना, सामूहिक विवादों को दूर करना दहेज प्रथा बन्द कराना।
12. जैविक कृषि का विकास एंव संबर्द्धन।
13. पंच ज (जन, जानवर, जल, जंगल, जमीन) के विकास हेतु कार्य करना। वृक्षारोपण, पशु-पालन, वनीकरण, बागवानी, नर्सरी, जडी-बूटी आदि महत्व एवं समृ0 हेतु कार्य करना।
14. पंचायती राज संस्थाओं को मजबूती प्रदान करने हेतु कार्य करना, पंचायत के विकास एवं उन्नयन हेतु कार्य करना।
15. खादी ग्रामोद्योग, कुटीर उद्योग को बढावा देना।
16. छुआ-छूत, जाति एवं साम्प्रदायिक भेदभाव, समाज व राष्ट्र विरोधी-द्रोही जैसे क्रिया-कलापों को रोकने, निर्मूल करने के लिये सामूहिक सद्प्रयास करना तथा इन्हें हक पूर्वक या पूर्व नियोजित रूप से न त्यागने वाले तत्वों संगठनों के विरूद्ध संवैधानिक कानूनी कार्यवाहियों को अमलमें लाने में सहयोग करना।
17. राष्ट्र तथा समाज के हित में आवश्यकता पडने पर गुप्तचर पद्धति से सकरात्मक और सृजनात्मक क्रिया-कलाप करना। इसके लिये समर्पित कार्यकर्ताओं, समूहों की नियुक्ति करना ताकि दोषी तत्वों को बेनकाब करके उन्हें कानून के हवाले किये जाने में सहयोग करना।
18. लोक-कला, साहित्य कला, संस्कृति, सूचना प्रसारण सहित सभी राष्ट्रीय एवं सामाजिक कार्य क्षेत्रों की समृ़िद्ध व संवर्द्धन हेतु आवश्यक कार्यक्रमों का आयोजन करना तथा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करना।
19. समाज कल्याण विभाग, केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों द्वारा, केन्द्रीय एवं समाज कल्याण, सलाहकार बोर्ड, कपार्ट, अवार्ड,नवार्ड, यनीसेफ, सिडवी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, डूडा, डवाकरा, सिफ्सा, सेफ इण्डिया, नोराड तथा अनुमोदित महिला एवं बाल विकास कार्यक्रमों तथा ग्रामीण विकास परियोजना का प्रचार-प्रसार एवं उनका संचालन करना।
20. आदिवासियों एवं अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजातियों विमुक्त जनजातियों का समग्र विकास करना व उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाना।
21. प्रकृतिक चिकित्सा, योग आयुर्वेदिक चिकित्सा होम्योपैथिक चिकित्सा एवं आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ जरूरतमन्द लोगों तक पहुचाने के लिये कार्यक्रम संचालित करना।
22. शिक्षा व्यवसाय, स्वालम्बन के उत्तरोत्तर विकास हेतु प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा व्यावसायिक तकनीकी शिक्षा के प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना व संचालन करना।
23. असहाय, निराश्रित बृद्धों, विधवओं, परित्यक्तता, बिन व्याही माँ आदि महिलाओं, जन्माध्यों, विकलांगों के कल्याण हेतु आश्रम व स्वावलम्बन केन्दों की धर्मार्थ स्थापना तथा उनके पुनवार्स की व्यवस्थायें, सरकारी आर्थिक सहायता/अनुदान आदि प्राप्त करके करना।